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बड़ी ख़बर: चूना व्यवसायी हत्याकांड के आरोपी शेरू सिंह की फांसी की सजा ख़ारिज ..

 ऐसे गंभीर मामलों में बिना किसी गंभीर न्यायिक बारीकियों को समझते हुए फाँसी की सजा का निर्णय देने के जल्दबाजी में आश्चर्य व्यक्त किया है और निर्देश दिया है कि, बिहार न्यायिक अकादमी में सभी सत्र न्यायाधीश को अपराध की गंभीरता और सजा देने की बारीकियों पर संवेदनशील किया जाए.
ओंकार नाथ सिंह उर्फ शेरू 

- पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
- बक्सर व्यवहार न्यायालय के न्यायाधीश को चार हफ्तों में पुनः विचार करने का दिया निर्देश

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: बक्सर में चूना व्यवसायी हत्याकांड के मुख्य आरोपी तथा बक्सर में कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले ओंकार नाथ सिंह उर्फ शेरू सिंह को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बड़ी राहत देते हुए बक्सर व्यवहार न्यायालय के जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पूर्व में सुनाए गए उस आदेश को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने शेरू सिंह को फांसी दिए जाने की बात कही थी. पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल के नेतृत्व में अनिल कुमार उपाध्याय के साथ डबल बेंच की न्यायालय ने शेरू सिंह के द्वारा की गई अपील के आलोक में दिए गए अपने आदेश में बक्सर के तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार मलिक के आदेश को गैर जिम्मेदाराना ठहराते हुए तत्काल प्रभाव से उस आदेश को रद्द करने की बात कही है. उन्होंने अपने आदेश में कहा है कि, फांसी जैसे मामलों में इस तरह जल्दीबाजी एवं बिना तथ्यों को समझे निर्णय देना दुर्भाग्यपूर्ण है.

चार हफ्तों के अंदर नया आदेश जारी करने का निर्देश:

अपने 99 पृष्ठों के आदेश में पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने शेरू सिंह के द्वारा घटना के समय खुद के नाबालिग होने के दावे के मद्देनजर पीएमसीएच के पांच डॉक्टरों की टीम के द्वारा इसकी पुष्टि करने हेतु मेडिकल कराने की बात कही है. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि, इस आदेश को निरस्त करने का आशय यह नहीं है कि, शेरू सिंह को उसके गुनाहों की सजा नहीं मिलेगी. उच्च न्यायालय ने मामले का पुनः विचारण चार हफ्तों में करने का आदेश ज़िला न्यायाधीश बक्सर को दिया है.

चर्चा में रहा है न्यायधीश प्रदीप कुमार मालिक का कार्यकाल:

बता दें कि, शेरू सिंह को फांसी दिए जाने का फैसला बक्सर के तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार मलिक ने सुनाया था. प्रदीप कुमार मलिक वर्तमान में सीतामढ़ी, कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के रूप में पदस्थापित हैं. बक्सर से पूर्व कटिहार तथा बक्सर आने के बाद भी जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार मलिक विभिन्न कारणों से सदैव चर्चा में बने रहते थे. उनके द्वारा सुनाए गए निर्णय को उच्च न्यायालय ने ऐसे गंभीर मामलों में बिना किसी गंभीर न्यायिक बारीकियों को समझते हुए फाँसी की सजा का निर्णय देने के जल्दबाजी में आश्चर्य व्यक्त किया है और निर्देश दिया है कि, बिहार न्यायिक अकादमी में सभी सत्र न्यायाधीश को अपराध की गंभीरता और सजा देने की बारीकियों पर संवेदनशील किया जाए.

भागलपुर जेल में बंद है शेरू सिंह:

शेरू सिंह वर्तमान में भागलपुर जेल में अपने सजा भुगत रहा है. बक्सर केंद्रीय कारा में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए वह तकरीबन 2 वर्ष पूर्व भागलपुर जेल में स्थानांतरित किया गया था तब से वह वहीं है.















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