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काली पट्टी बांधकर मंत्री के सामने आए सीएस-चिकित्सक, डैमेज कंट्रोल करते रहे अश्विनी चौबे ..

मंत्री ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को भांपा और डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू की. काफी मान-मनौव्वल के बाद डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी माने. लेकिन, साथ ही मंत्री के पीएस महोदय को यह भी नसीहत दे डाली कि, डॉक्टरों और सिविल सर्जन से कैसे बात करनी है.

- स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए पहुंचे थे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री
-  निजी सहायक को दी नसीहत, बात करने का सीखें ढंग

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री के सामने आज उस समय अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई जब उनके पीएस और सिविल सर्जन एकदूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करते हुए मंत्रीजी के कार्यक्रम में पहुंच गए. सिविल सर्जन के समर्थन में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी काली पट्टी लगाकर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री के कार्यक्रम में पहुंचे. मंत्री ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को भांपा और डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू की. काफी मान-मनौव्वल के बाद डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी माने. लेकिन, साथ ही मंत्री के पीएस महोदय को यह भी नसीहत दे डाली कि, डॉक्टरों और सिविल सर्जन से कैसे बात करनी है.

सीएस और पीएस में तनातनी:

दरअसल, आज अश्विनी चौबे स्वास्थ्य प्रगति प्रतिवेदन की समीक्षा करने अपने संसदीय क्षेत्र बक्सर आए थे. इसी दौरान उनके पीएस नारायण ओझा और सिविल सर्जन के बीच किसी बात को लेकर तनातनी हो गई. सिविल सर्जन का आरोप था कि मंत्रीजी के पीएस ने उनसे उंची आवाज में बात की है, जबकि मंत्रीजी के प्रतिनिधि नारायण ओझा का कहना था कि सिविल सर्जन से स्वास्थ्य सुविधाओं में लापरवाही की शिकायत की तो अपनी नाकामी छुपाने के लिए वे भड़क गईं.

काली पट्टी लगाकर आए:

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे भी आज अपने संसदीय क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की प्रगति की समीक्षा करने आए थे. उन्हें जिले की स्वास्थ्य प्रगति प्रतिवेदन भी लेना था. इस दौरान सभी डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अपनी-अपनी तैयारी में थे. सभी मंत्री के कार्यक्रम में शामिल तो हुए, लेकिन काली पट्टी लगाकर. डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को काली पट्टी लगाकर कार्यक्रम में शामिल होते देख मंत्री सकते में आ गए. इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली.

डैमेज कंट्रोल में जुटे मंत्रीजी:

अपने ही पीएस और अपने जिले की सिविल सर्जन की बातों को सुनने के बाद मंत्रीजी डैमेज कंट्रोल में जुट गए. दरअसल, दोनों एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे थे. सिविल सर्जन कह रहीं थीं कि पीएस ने उंची आवाज में बात की है, जबकि पीएस से इसे सिरे से नकार रहे थे. वे कह रहे थे कि स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी मांगी थी. अपनी नाकामी छुपाने के लिए वे अनर्गल आरोप लगा रहीं हैं.

मान-मनौव्वल में जुटे मंत्रीजी:

मंत्री अश्विनी चौबे आरोप-प्रत्यारोप होता देख स्वास्थ्य प्रगति प्रतिवेदन की मांग के बजाय डॉक्टरों के मान-मनव्वल में जुट गए. अंततः डॉक्टरों के आगे मंत्रीजी ने ही झुकना मुनासिब समझा. उसके बाद कार्यक्रम की शुरुआत हो सकी. मंत्री ने कहा कि बक्सर सिविल सर्जन ने उनके प्रतिनिधि के खिलाफ उंची आवाज में बात करने की शिकायत की है. मंत्री ने कहा कि काम का प्रेशर है और जनता भी समस्या कहती है. सिविल सर्जन को भी बहुत काम है। इसलिए सामंजस्य जरूरी है.

डॉक्टरों के तेवर तल्ख:

इधर मंत्री के प्रतिनिधि द्वारा सिविल सर्जन से अभद्रता को लेकर डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि, सिविल सर्जन से सम्मान की भाषा मे बात करनी चाहिए. इसकी शिकायत मंत्री के सामने दर्ज कराई गई है. बक्सर स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के नेता विजय पांडेय ने कहा कि, स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सको से सम्मान दें, नहीं तो ऐसा आंदोलन होगा कि इतिहास बन जाएगा. डॉक्टरों के मान-सम्मान से खिलवा़ड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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