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रामराज लाने के लिए भरत जी के चरित्र को जानना होगा- ब्रह्म स्वरूप महाराज

भाई वंशीधर तथा भौजाई दुरित गौरी भजन कीर्तन से विमुख थे. भौजाई की प्रताड़ना से वह घर छोड़कर निकल गए. लेकिन, उन्हें संत का सानिध्य मिला भगवान की कृपा से और संसार के वास्तविक स्वरूप से परिचित हुए.

- नेहनिधि नारायण सद्गुरुदेव पुण्य स्मृति महोत्सव का हुआ शुभारंभ.

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: विश्व संत के रूप में विख्यात  नारायण दास भक्तमाली मामा जी महाराज की पुण्य स्मृति में श्री नेहनिधि नारायण सद्गुरुदेव पुण्य स्मृति महोत्सव का आयोजन सदर प्रखंड के कमरपुर में किया गया है. लगातार 12 वें वर्ष आयोजित कार्यक्रम  शनिवार की सुबह हनुमान चालीसा के सामूहिक सस्वर अखंड पाठ एवं दोपहर भक्तमाल चरित्र के सामूहिक पाठ के साथ शुरू हुआ.

दोपहर में वृंदावन धाम से पधारे श्री राम कथा के सरस एवं सुमधुर गायक अनंत श्री विभूषित ब्रह्म स्वरूप जी महाराज ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि, रामचरित मानस सभी ग्रंथों का सार है. अगर मानस का पाठ करते है तो सभी दुख ख़त्म हो जाते हैं. और अगर खत्म ना हो तो मान लीजिए कि, आपको भगवान के प्रति प्रेम नही है.

उन्होंने कहा कि, भगवत चरित्र अगर श्रद्धा पूर्वक, ध्यान से सुना जाए तो अवश्य ही सीताराम जी से प्रेम होगा. अगर प्रेम को जानना है तो श्रीराम के भाई भरत जी के जीवन चरित्र को जानने की आवश्यकता है. वहीं, भरत चरित्र की कथा प्रारंभ करते हुए कथावाचक ब्रह्म स्वरूप जी महाराज ने कहा कि, रामराज की जो व्यवस्था थी वह प्रेममई व्यवस्था थी. पर आज के कलयुग के प्रेम से रामराज सम्भव नहीं.

मामाजी महाराज रचित भक्त नरसी मेहता लीला का हुआ मंचन:

रात्रि में भक्त नरसी मेहता के जीवन चरित्र पर आधारित लीला का मंचन किया गया. जिनमे दिखाया गया कि, नरसी मेहता जो गुजरात के संत है. भगवान का उद्घोष है कि, कभी तो मैं स्वयं और कभी अपने भक्त के माध्यम से जीवों के उद्धार हेतु लीला की रचना करता हूँ. इसी क्रम में अपने प्यारे भक्त मुचुकुन्द को नरसी मेहता के रूप में प्रकट किया. बचपन से ही नरसी मेहता संतों के साथ भजन कीर्तन में सम्मिलित होते थे. माता पिता दिवंगत हो चुके थे. भाई वंशीधर तथा भौजाई दुरित गौरी भजन कीर्तन से विमुख थे. भौजाई की प्रताड़ना से वह घर छोड़कर निकल गए. लेकिन, उन्हें संत का सानिध्य मिला भगवान की कृपा से और संसार के वास्तविक स्वरूप से परिचित हुए.

लीला में मुख्य भूमिका में श्री कृष्ण-कुश, नारद- हरिजी, नरसी- प्रियांशु, शंकरजी- पुरुषोत्तम, पार्वती-प्रिंस, राधा- दिलीप, सूरदास-अशोक तथा बचाजी,अनिमेष, नंद बिहारी, लालाजी, धनंजय, राजेश, अनीश, अंकित, राजऋषि, जयशंकर समेत अन्य कलाकार लीला के किरदार में रहे. आयोजनकर्ताओं ने बताया कि, सभी ग्रामीण इस उत्सव को सफल बनाने हेतु दिन रात सेवा में लगे हुए हैं.















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