Header Ads

Buxar Top News: सिय-पिय मिलन महोत्सव: रामलीला में जय-विजय लीला का मंचन देखकर भाव विभोर हुए श्रद्धालु,19 नवंबर को बक्सर आएंगे मोरारी बापू.

शुक्रवार को सिय-पिय मिलन महोत्सव के दौरान शुक्रवार को दूसरा दिन था.

- 48 वें सिय-पिय मिलन महोत्सव का आज था दूसरा दिन.
- राम नाम की गूंज से गुंजायमान है बक्सर.

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: विगत 48 वर्षों से श्री हरि गुरु वैष्णव कृपा से श्री महर्षि खाकी बाबा सरकार के 48 वें निर्वाण दिवस के अवसर पर श्री सीताराम विवाह महोत्सव एवं विशाल सत्संग समारोह का आयोजन दूसरे दिन भी सुबह से ही कार्यक्रमों का आयोजन होते रहा. गुरुवार से नया बाजार स्थित विवाह महोत्सव स्थल पर भक्तिमय वातावरण कायम हो गया है. आश्रम पर दूसरे दिन सुबह 6 बजे से ही रामचरितमानस का सामूहिक नवाह परायण, इसके बाद 9 बजे सुबह से 12  बजे दोपहर तक कृष्ण लीला एवं 2 बजे से 3 बजे तक झांकी एवं पदगायन विश्वनाथ शुक्ला श्रृंगारी जी के द्वारा किया गया. इसके साथ ही 3 बजे दिन से 7 बजे अपराहन तक भक्तमाल कथा का आयोजन हुआ. रात्रि 9 बजे से 12 बजे तक रामलीला का आयोजन हुआ.


रामलीला में जय विजय लीला का हुआ है आयोजन

सनकादि ऋषि भगवान विष्णु से मिलने के लिए उनके आवाज़ पर पहुंचते हैं. भगवान विष्णु से मिलने के लिए जैसे ही उनके दरवाजे पर पहुंचते हैं जय विजय दोनों पार्षद ऋषियों को अंदर जाने से रोक लेते हैं. उनके इस प्रकार मना करने पर सनकादिक ऋषियों ने कहा, "अरे मूर्खों! हम तो भगवान विष्णु के परम भक्त हैं.  हमारी गति कहीं भी नहीं रुकती है. हम देवाधिदेव के दर्शन करना चाहते हैं. तुम हमें उनके दर्शनों से क्यों रोकते हो? तुम लोग तो भगवान की सेवा में रहते हो, तुम्हें तो उन्हीं के समान समदर्शी होना चाहिये. भगवान का स्वभाव परम शान्तिमय है, तुम्हारा स्वभाव भी वैसा ही होना चाहिये. हमें भगवान विष्णु के दर्शन के लिये जाने दो. ऋषियों के इस प्रकार कहने पर भी जय और विजय उन्हें बैकुण्ठ के अन्दर जाने से रोकने लगे. जय और विजय के इस प्रकार रोकने पर सनकादिक ऋषियों ने क्रुद्ध होकर कहा, भगवान विष्णु के समीप रहने के बाद भी तुम लोगों में अहंकार आ गया है और अहंकारी का वास बैकुण्ठ में नहीं हो सकता. इसलिये हम तुम्हें शाप देते हैं कि तुम लोग पापयोनि में जाओ और अपने पाप का फल भुगतो. उनके इस प्रकार शाप देने पर जय और विजय भयभीत होकर उनके चरणों में गिर पड़े और क्षमा माँगने लगे.

यह जान कर कि सनकादिक ऋषिगण भेंट करने आये हैं भगवान विष्णु स्वयं लक्ष्मी जी एवं अपने समस्त पार्षदों के साथ उनके स्वागत के लिय पधारे. भगवान विष्णु ने उनसे कहा, हे मुनीश्वरों! ये जय और विजय नाम के मेरे पार्षद हैं. इन दोनों ने अहंकार बुद्धि को धारण कर आपका अपमान करके अपराध किया है. आप लोग मेरे प्रिय भक्त हैं और इन्होंने आपकी अवज्ञा करके मेरी भी अवज्ञा की है. इनको शाप देकर आपने उत्तम कार्य किया है. इन अनुचरों ने तपस्वियों का तिरस्कार किया है और उसे मैं अपना ही तिरस्कार मानता हूँ.  मैं इन पार्षदों की ओर से क्षमा याचना करता हूँ. सेवकों का अपराध होने पर भी संसार स्वामी का ही अपराध मानता है. अतः मैं आप लोगों की प्रसन्नता की भिक्षा चाहता हूँ.

भगवान के इन मधुर वचनों से सनकादिक ऋषियों का क्रोध तत्काल शान्त हो गया. भगवान की इस उदारता से वे अति अनन्दित हुये और बोले, आप धर्म की मर्यादा रखने के लिये ही अपने इतना आदर देते हैं. हे नाथ! हमने इन निरपराध पार्षदों को क्रोध के वश में होकर शाप दे दिया है इसके लिये हम क्षमा चाहते हैं. आप उचित समझें तो इन द्वारपालों को क्षमा करके हमारे शाप से मुक्त कर सकते हैं.

भगवान विष्णु ने कहा, हे मुनिगणों! मै सर्वशक्तिमान होने के बाद भी ब्राह्मणों के वचन को असत्य नहीं करना चाहता क्योंकि इससे धर्म का उल्लंघन होता है. आपने जो शाप दिया है वह मेरी ही प्रेरणा से हुआ है. ये अवश्य ही इस दण्ड के भागी हैं. ये दिति के गर्भ में जाकर दैत्य योनि को प्राप्त करेंगे और मेरे द्वारा इनका संहार होगा. ये मुझसे शत्रुभाव रखते हुये भी मेरे ही ध्यान में लीन रहेंगे. मेरे द्वारा इनका संहार होने के बाद ये पुनः इस धाम में वापस आ जावेंगे.

कृष्ण लीला में कृष्ण के जन्म का हुआ मंचन

नगर के नया बाजार स्थित हो रही है सीय पिया मिलन समारोह के दूसरे दिन भगवान श्री कृष्ण के जन्म का मंचन किया गया. श्री कृष्ण के जन्म उत्सव को देख श्रद्धालु भाव विभोर हो गए. श्रद्धालुओं के लिये यह अद्भुत क्षण था. सभी लोग कृष्ण भक्ति में इस कदर तल्लीन थे कि किसी को अपनी स्थिति का भान नहीं रहा. कृष्ण के जन्म होते हैं गोकुलधाम में उत्सव का माहौल कायम हो गया. लीला का आयोजन बृंदावन से आये  निर्जरा श्यामा श्यामा लीला संस्थान द्वारा चारों तरफ खुशी की लहर दौड़ पड़ी. कलाकारों के भावपूर्ण अदाकारी ने नाटक को सजीवता प्रदान की. कृष्ण जन्म की झांकी का मनोरम दृश्य देखकर दर्शकों ने खूब जय कन्हैया लाल का जयकारा लगाने लगे.


 नशा मानव जीवन को तबाही की ओर ले जाता है

भक्त प्रहलाद परम भक्त थे. हिरण्यकश्यप ने भगवान से विमुख करने के लिए नित नए प्रकट किए. चूंकि हिरण्यकश्यप ने वरदान ले रखा था कि न दिन में मारा जाउंगा न रात में, न आदमी से न वानर से इसलिए भगवान ने प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार लिया. इसी तरह पांच साल के ध्रुव की भगवान में ललक देखकर मां ने ही उपेक्षित करना शुरू कर दिया था. उन्होंने कहा कि भगवान भोग के नहीं भाव के भूखे होते हैं. भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा भी है कि जो मुझे जिस भाव से भजता है मैं भी उसे उसी भाव में फल प्रदान करता हूं. अभिमान, धन-दौलत, बल, रूप, आशक्ति शराब आदि नशा मानव जीवन को तबाही की ओर ले जाता है. वहीं, प्रभु भक्ति का नशा सुख, समृद्धि, कल्याण समाज के उत्थान की ओर ले जाने वाला मार्ग है. जो व्यक्ति जिस पदार्थ या सद्‌गुण-अवगुण का नशा करता है, उसी के अनुसार उसकी प्रवृत्ति तैयार होती है. इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रभु भक्ति का नशा करना चाहिए. प्रभु भक्ति का नशा करने वाले व्यक्ति को परमात्मा सद्‌बुद्धि, आत्मबल विवेक जैसे गुण प्रदान करता है.


19 नवंबर को आएंगे मुरारी बापू

19 नवंबर को मुरारी बापू नया बाजार स्थित कार्यक्रम स्थल पर रामकथा के लिए आ रहे हैं. इसकी जानकारी राजा राम शरण दास जी महाराज ने देते हुए कहा कि प्रख्यात मानस मर्मज्ञ मुरारी बापू का आगमन 19 नवंबर को सुनिश्चित हुआ है. 19 नवंबर को मुरारी बापू के कथा का भक्त श्रद्धालु लाभ उठाएंगे.

 














No comments