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निर्भया के गुनहगारों की फांसी के लिए बक्सर में बनकर तैयार हैं फांसी के फंदे ..

देश व समाज दुश्मनों को उनके किए की सजा देने के लिए बनाई जाने वाली मनीला रस्सी खास होती है. गले में लिपट बिना तकलीफ मौत की नींद सुलाने वाली रस्सी को बनाने के लिए खास विधि अपनाई जाती है.

- 1 माह पूर्व ही शुरू हो गया था निर्माण कार्य
- 18 फीट के फांसी के फंदे से मिलती है आराम की मौत.

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: एक बार फिर निर्भया के गुनाहगारों को फांसी दिए जाने की बात सामने आ रही है. जिसके आलोक में तकरीबन 1 माह पूर्व ही बक्सर के केंद्रीय कारा में फांसी के लिए विशेष मनीला रस्सी का निर्माण किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि, निर्भया के कातिलों को सज़ा देने के लिए बक्सर का फंदा बनकर तैयार है. 

दरअसल, जब भी किसी अपराधी को मौत की सजा दी जाती है तो बक्सर की मनीला रस्सी की चर्चा शुरू हो जाती है. पूरे देश में केवल बक्सर जेल में ही फांसी देने वाली खास रस्सी तैयार होती है. यहीं की बनी रस्सी से कसाब व अफजल जैसे देश के दुश्मनों को फांसी दी गई थी. 

देश में आजादी के पहले से अबतक जितनी फांसियां दी गई, उनमें बक्सर जेल में बनी मनीला रस्सी का ही इस्तेमाल हुआ. हौले से गले में लिपट दोषियों को आराम से मौत देने वाली इस रस्सी को विशेष रूप से तैयार किया जाता है.


मनीला रस्सी का इतिहास

वर्ष 1844 ई. में अंग्रेज शासकों द्वारा केन्द्रीय कारा बक्सर में मौत का फंदा तैयार करने की फैक्ट्री लगाई गई थी. इससे पहले यह रस्सी फिलीपींस के मनीला जेल में बनती थी, इसलिए इसे मनीला रस्सी भी कहा जाता था. यहां तैयार किए गए मौत के फंदे से पहली बार सन 1884 ई. में एक भारतीय नागरिक को फांसी पर लटकाया गया था.

वर्तमान समय में देश में जब-जब मौत का फरमान जारी होता है, तब-तब केन्द्रीय कारा बक्सर के कैदी ही मौत का फंदा तैयार करते हैं. फैक्ट्री लॉ में बक्सर केन्द्रीय कारा को छोड़ कर इस क्वालिटी की रस्सी के निर्माण पर पूरे देश में पूर्ण प्रतिबंध है.

कैदी बनाते हैं रस्सी:

केंद्रीय कारा के कैदी पुनर्वास प्रशिक्षण केंद्र में फांसी का फंदा वाली रस्सी का निर्माण होता है. देश व समाज दुश्मनों को उनके किए की सजा देने के लिए बनाई जाने वाली मनीला रस्सी खास होती है. गले में लिपट बिना तकलीफ मौत की नींद सुलाने वाली रस्सी को बनाने के लिए खास विधि अपनाई जाती है.

पहले कच्चे सूत से एक-एक कर अठारह धागे तैयार किए जाते हैं. सभी को मोम में पूरी तरह संतृप्त किया जाता है. इसके बाद सभी धागों को मिलाकर एक मोटी रस्सी तैयार की जाती है. एक फांसी के लिए अठारह फीट रस्सी तैयार की जाती है. बताया जा रहा है कि रस्सियों के दोनों किनारों पर पीतल का कैप भी लगाया जा रहा है.
















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