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ज्ञान प्रसार फॉउंडेशन के सौजन्य से सरकारी विद्यालय में पहली बार लगाया गया विज्ञान मेला ..

टेस्ट के माध्यम से इस काबिल बनाया जाता है कि वह निजी स्कूलों के बच्चों से कहीं कम नहीं रहे. सबसे अहम बात यह है कि संस्था के माध्यम से लगातार छठी क्लास से ही टेस्ट देने आ रहे तकरीबन 25 बच्चे मैट्रिक की परीक्षा में 90 फीसद अंकों के साथ उत्तीर्ण हुए हैं.  
बच्चों के मॉडलों का अवलोकन करते अतिथि


- जिले के चौगाई में आयोजित था कार्यक्रम.
- गूगल ब्वाय के गुरु समेत कई प्रबुद्धजन रहे मौके पर मौजूद. 

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: प्रखंड के स्थानीय गांव स्थित म.वि.लक्ष्मीपुर स्कूल में बुधवार को स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा विज्ञान मेला का आयोजन किया गया. विज्ञान प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि गूगल ब्यॉय कौटिल्य के गुरु आर.के श्रीवास्तव, रेडक्रास बक्सर के उपाध्यक्ष डॉ.शशांक शेखर एवं शिक्षाविद् अरूण ओझा ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया. ज्ञान प्रसार फाउंडेशन के सौजन्य से आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में शामिल अतिथियों ने स्कूली बच्चों द्वारा तैयार मॉडलों की सराहना की.
मौके पर मौजूद बच्चे एवं अतिथि

मुख्य अतिथि आर.के.श्रीवास्तव ने कहा कि यह पहला अवसर है जब सरकारी स्कूलों के बच्चों द्वारा विज्ञान प्रदर्शनी में मॉडल प्रस्तुत किए गए. मॉडलों में उ.वि. चौगाई के बच्चों द्वारा वायु प्रदूषण, म.वि.नचाप द्वारा सोलर सिस्टम, म.वि. मसर्हियां के बच्चे रेन वाटर हार्वेस्टिग, जलचक्र लकड़ी के नाव प्रस्तुत किए. म.वि. चौगाईं के बच्चे पुदीना, एलोवेरा, क्रिसमस ट्री एवं गुलाब प्रस्तुत किए. वहीं, ताजमहल, स्वच्छ भारत अभियान, सुंदरनगर, हाइड्रोलिक क्रेन, जेसीबी, वेस्ट वाटर एवं फिल्ट्रेशन प्लांट जैसे कई मॉडलों की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया. कार्यक्रम का संचालन सौरभ पाठक ने किया. सभी छात्रों को प्रशस्ति-पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया. इस मौके पर संजय केसरी, मो. नसीम, अमित कुमार, संजय उपाध्याय, अजय कुमार, मंगल महेश, प्रवीण कुमार, त्रिलोकी नाथ पांडेय एवं सुबोध सिंह, गिरीश कुमार,  अमित कुमार, रंजीत पांडेय, अजय सिंह  सहित कई लोग शामिल रहे.
गूगल ब्वॉय आर्यभट्ट के गुरु को सम्मानित करते कमेटी के सदस्य

इस बाबत जानकारी देते हुए संस्था के संजय उपाध्याय ने बताया कि ज्ञान प्रसार फाउंडेशन प्रतिभाओं को उभारने के लिए सदैव प्रयासरत है. संस्था द्वारा रोहतास और पूरे बक्सर जिले से तकरीबन 15 सौ बच्चे हर महीने के एक रविवार को एक टेस्ट में शामिल होने के लिए पहुंचते हैं. बच्चे लगभग 20 से 25 किलोमीटर दूर से भी आते हैं. जिनको टेस्ट के माध्यम से इस काबिल बनाया जाता है कि वह निजी स्कूलों के बच्चों से कहीं कम नहीं रहे. सबसे अहम बात यह है कि संस्था के माध्यम से लगातार छठी क्लास से ही टेस्ट देने आ रहे तकरीबन 25 बच्चे मैट्रिक की परीक्षा में 90 फीसद अंकों के साथ उत्तीर्ण हुए हैं.  ऐसे में जहां संस्था का उद्देश्य पूरा हो रहा है वहीं बच्चों का बेहतरीन भविष्य देख कर आत्म संतुष्टि भी हो रही है.














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