बड़ी ख़बर: न्यायालय का बड़ा फैसला, हत्यारोपी नौ अभियुक्तों पर दोष सिद्ध ..
सियाराम यादव के दलान पर सोये हुये थे व हरेराम यादव छत पर बने मड़ई में सोये हुये थे. परिवार के अन्य लोग घर के अंदर कमरे में सोये हुए थे. अचानक 3 बजे सुबह के आस-पास भैया रामायण यादव की चीखने की आवाज सुनी
- वर्ष 2014 में पूर्व आपसी विवाद के कारण हुई थी हत्या.
- त्वरित न्यायालय द्वितीय द्वारा सुनाया गया फ़ैसला.
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: वर्ष 2014 में पूर्व के आपसी विवाद के कारण हुई थी हत्या के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए त्वरित न्यायालय द्वितीय वीरेंद्र सिंह की अदालत के द्वारा नौ अभियुक्तों को भादवि की धारा 302/34 I.P.C के अंतर्गत आरोपित पाते हुये दोषी करार दिया गया है. न्यायालय द्वारा दोषी नौ अभियुक्तों को शुक्रवार को सजा सुनाई जाएगी.
बता दें कि हरेराम यादव पिता स्व० बालू यादव( 52 वर्ष) ने 07 नवंबर 2014 को सिकरौल थानाध्यक्ष के समक्ष अपना बयान दिया कि मेरा बड़ा भाई रामायण यादव, पिता- स्व०बालू यादव खाना खाकर अपने भाई सियाराम यादव के दलान पर सोये हुये थे व हरेराम यादव छत पर बने मड़ई में सोये हुये थे. परिवार के अन्य लोग घर के अंदर कमरे में सोये हुए थे. अचानक 3 बजे सुबह के आस-पास भैया रामायण यादव की चीखने की आवाज सुनी और ऊपर से बिजली की रोशनी में झांककर देखा तो उनके ही गांव के गणेश यादव तथा रामप्रवेश यादव, पिता- लोलि यादव, ललन यादव- पिता:-स्व०वासुदेव यादव, शिवजी यादव, पिता-त्रिवेणी यादव सभी साकिन- रेंका, थाना -सिकरौल व बहादुर यादव, पिता-जगदीश यादव, साकिन- तेनुआद मठिया, थाना -दिनारा, जिला-रोहतास नाद के पास बाहर में खड़े थे. इन सभी लोगो के पास हथियार था. मुझे शक हुआ तो मैं हल्ला करते हुए नीचे आया तथा दरवाजा खोलते हुए बाहर आया तो देखा की भैया के पास और चार लोग पराहु यादव, लोरिक यादव दोनों पिता-मोहन यादव, एकराम यादव, मुन्ना यादव दोनों पिता-पराहु यादव सभी साकिन रेंका, थाना- सिकरौल ललकारते हुए तेजी से भाग गये. बाद में देखने पर ज्ञात हुआ कि रामायण यादव मृत हो चुके हैं.
मामले के संबंधित थाने में कांड संख्या 126/14 दर्ज कराया गया व मामला त्वारित न्याय परिषद में लाया गया था। जिसमें सेशन ट्रायल 274/16 दर्ज कराया गया था. बुधवार को हुई न्यायिक कार्यवाही के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से अधिवक्ता राम कृष्णा चौबे व त्रिलोकी मोहन मौजूद रहे. वहीं बचाव पक्ष की तरफ से कृपाशंकर राय ने मामले की पैरवी की.
- न्यायालय सवांददाता राघव पाण्डेय की रिपोर्ट














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