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जिसको दुनिया अनदेखा करती है, उसे ठाकुर जी देखते हैं - मोरारी बापू

सिद्धाश्रम की पावन भूमि अपने आप में सिद्ध स्थली रही है. यह धरती साधू संतों की पावन धरती रही है जहां तपस्या में लीन ऋषि मुनि अपनी साधना को सिद्ध करने में लगे रहते थे. बापू ने बताया कि, अहिल्या आश्रम जैसा पूरी दुनिया में कोई आश्रम नहीं है. 

- बक्सर में नौ दिवसीय राम कथा पाठ करने पहुंचे हैं राष्ट्रसंत.
- मानस अहिल्या पर आधारित होगा अबकी बार का संवाद.


बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: जिसको दुनिया अनदेखा करती है उसको ठाकुर जी देखते हैं यह कहना है राष्ट्रसंत के रूप में ख्याति प्राप्त मोरारी बापू का बक्सर में अपने राम कथा पाठ के पहले दिन बाजार समिति प्रांगण में बने विशाल मंच पर बैठकर वह यह बात कह रहे थे उन्होंने लोगों को रामायण कथा राम कथा का महत्व बताते हुए कहा कि रामायण की कथा में तीन सभ्यताओं का अद्भूत समागम स्थापित किया गया है. प्रभु श्री राम का पूरा जीवन काल अयोध्या, चित्रकूट और लंका की सभ्यताओं के बीच विचरण करता रहा है. इन तीनों स्थानों की सभ्यता का रामायण में बेहतर वर्णन किया गया है. 


बापू ने कहा कि, रामायण के विभिन्न प्रसंगों में इन्हीं तीनों स्थानों की सभ्यता और संस्कृृति का जिक्र है. गोस्वामी तुलसीदास जी ने तीनों सभ्यताओं का अद्भूत संगम अपने रामायण में उल्लेखित किया है. और यह तीनों सभ्यताएं सिद्धाश्रम बक्सर की भूमि पर ही आकर सिद्ध हुई हैं. बक्सर की भूमि की महत्ता बताते हुए बापू ने कहा कि अहिल्या के उद्धार की भूमि होने के कारण और भी पवित्र हो गई है. सिद्धाश्रम की पावन भूमि अपने आप में सिद्ध स्थली रही है. यह धरती साधू संतों की पावन धरती रही है जहां तपस्या में लीन ऋषि मुनि अपनी साधना को सिद्ध करने में लगे रहते थे. बापू ने बताया कि, अहिल्या आश्रम जैसा पूरी दुनिया में कोई आश्रम नहीं है. 

बापू ने कथा प्रारंभ करने से पहले बताया कि इस पावन धरती पर आज तीसरी दफा नौ दिनों तक संवाद का अवसर पाकर वो धन्य हो गए. इस दौरान पूज्य श्री मामा जी के संस्मरणों को याद करते बापू की आंखें नम हो आई. उन्होंने कहा कि, मामा जी जब होते थे तो दौड़कर उनका स्वागत करते थे. आज उनकी कमी उन्हें खटक रही है. इसके पूर्व राष्ट्रीय संत मुरारी बापू ने बक्सर की धरती पर अपने कोमल पांव रखने के साथ ही सबसे पहले अहिल्या आश्रम जाकर माता अहिल्या का दर्शन किया. बाजार समिति के विशाल प्रांगण में बने भव्य पंडाल में बापू ने सबसे पहले व्यास पीठ का पूजन आदि के बाद प्रभु श्रीराम को याद करते हुए नमन किया. उन्होंने बताया कि अहिल्या के उद्धार की धरती पर नौ दिनों तक उनका संवाद मानस अहिल्या पर ही आधारित होगा. 

इस दौरान बापू का संवाद श्रवण के लिए महोत्सव में संत मनमोहन शरण दस, वृंदावन के राममोहन दास जी महाराज, कुरुक्षेत्र के विराट गुरु, वृंदावन के यादवेंद्र शरण जी महाराज, चित्रकूट के युगल किशोर जी महाराज, अवध क्षेत्र के अजय शरण जी महाराज, वृंदावन के बाबा रामदास जी महाराज, बसांव पीठाधीश्वर अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज, गंगापुत्र त्रिदंडी स्वामी जी महाराज, वृंदावन के गिरिधर गोपाल जी महाराज आदि समेत सैकड़ों की संख्या में देश के कोने-कोने से पधारे पूज्य श्री मामाजी के भक्तों के साथ हजारों स्थानीय लोग शामिल थे. रविवार से प्रति दिन सुबह 9.30 से बापू का संवाद शुरू होगा.



















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