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सरकार तक पहुंची डीडीसी के भ्रष्टाचार की गूंज ..

जब ऑडिट के लिए राज्य सरकार से टीम आती है तो उस समय भी डीडीसी के इस सेवक द्वारा द्वारा डरा-धमकाकर प्रति पंचायत रोजगार सेवक तथा मुखिया से 20-20 हजार रुपये की वसूली की जाती है और कहा जाता है कि ये सभी राशि ऑडिट टीम तथा उप विकास आयुक्त को मिलेगी. 


- डीडीसी के लिए लाखों रुपए की वसूली.
- कर्मियों ने लिखा सरकार के अवर सचिव को पत्र.

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: उप विकास आयुक्त पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. इन आरोपों की गूँज प्रशासनिक महकमे में ही नहीं बल्कि, राज्य सरकार तक भी पहुंच गई है. मामले को लेकर बिहार सरकार को अवगत कराया गया है. मामला कनीय अभियंता और पंचायत तकनीकी सहायकों से लाखों रुपये की वसूली का है. बताया जा रहा है कि, मनरेगा के इन कर्मियों को नौकरी से बर्खास्त करने की धमकी देकर उनके वेतन से हमेशा पांच से दस हजार रुपये की वसूली की जाती रही है. बताया जा रहा है कि यह वसूली  उप विकास आयुक्त के नजदीकी रहे ग्रामीण विकास अभिकरण में पदस्थापित कर्मी मुकेश कुमार के द्वारा की जाती रही है. 

बिहार सरकार के अवर सचिव को लिखा गया पत्र:

बताया जा रहा है कि, मामला लाखों रुपये के भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है. जिसको लेकर कनीय अभियंता और पंचायत तकनीकी सहायकों ने सीधे ने बिहार सरकार के अवर सचिव सदय कुमार सिन्हा को इस मामले से अवगत कराया है. जिसके आलोक में उन्होंने जिलाधिकारी राघवेन्द्र सिंह को मामले की जांच करा प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.

स्थानीय पदाधिकारियों से जताया डर:

इस पत्र के जिले में आने के बाद प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया है. इस संबंध में पूछे जाने पर प्रभारी जिलाधिकारी चंद्रशेखर झा ने बताया कि, पत्र आने के बाद इसकी जांच की जिम्मेवारी अपर समाहर्ता एवं डीएसपी मुख्यालय को सौंपी गई है. जांच रिपोर्ट आने के बाद अवर सचिव को प्रतिवेदित कर दिया जाएगा. कनीय अभियंता और पंचायत तकनीकी सहायकों ने कहा है कि, उनको स्थानीय पदाधिकारियों से डर है. इसलिए सीधे विजिलेंस से इसकी जांच कराने की मांग की है. कनीय अभियंता और पंचायत तकनीकी सहायकों ने लिखा है कि वसूली करने वाले कर्मी मुकेश के द्वारा कहा जाता है कि मैं उप विकास आयुक्त की छत्रछाया में हूं. मैं उनका रिश्तेदार हूं. रुपये समय पर दो नहीं तो उप विकास आयुक्त के द्वारा योजना जांच कर गलत प्रतिवेदन लिखकर बर्खास्त करा दिया जाएगा. कर्मियों ने कहा है कि उनके द्वारा ऐसा कराया भी गया है और गलत जांच प्रतिवेदन के आधार पर उन सभी से अनेक बार राशि की उगाही की गई है.

डीडीसी पर पहले भी लगे हैं कई आरोप:

डीडीसी पर भ्रष्टाचार के पहले भी कई आरोप लग चुके हैं. हालांकि, कई कारणों से वह खुल कर सामने नहीं आ पाते. सूत्रों की माने तो जिले के कई ठेकेदारों से भी वसूली के किस्से भी सदैव चर्चा में रहते हैं. नाम ना छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि, पिछले ही दिनों सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के प्रचार प्रसार के लिए नियमों को ताक पर रखते हुए इन्होंने अपने किसी चहेते एनजीओ संचालक को ठीका दे दिया था जिसकी शिकायत जिलाधिकारी तक पहुंचने पर जिलाधिकारी ने इन्हें फटकार लगाई थी.

इंडियन बैंक के पीछे आवास है वसूली का अड्डा:

कनीय अभियंता और पंचायत तकनीकी सहायकों ने कहा है कि, उन सभी से यह अवैध राशि मुकेश कुमार के द्वारा इंडियन बैंक के पीछे स्थित आवास पर की जाती है. कहा जाता है कि कार्यालय आने पर जिलाधिकारी देख लेंगे. 

ऑडिट के समय होती है 20-20 हजार की वसूली

कनीय अभियंता और पंचायत तकनीकी सहायकों ने कहा है कि जब ऑडिट के लिए राज्य सरकार से टीम आती है तो उस समय भी डीडीसी के इस सेवक द्वारा द्वारा डरा-धमकाकर प्रति पंचायत रोजगार सेवक तथा मुखिया से 20-20 हजार रुपये की वसूली की जाती है और कहा जाता है कि ये सभी राशि ऑडिट टीम तथा उप विकास आयुक्त को मिलेगी. 

वसूली के पैसों से खरीदी गई है 80 लाख रुपये की जमीन:

कनीय अभियंता और पंचायत तकनीकी सहायकों ने बताया है कि, वसूली के पैसों से समाहरणालय के समीप ही 80 लाख रुपयों की कीमत की जमीन खरीदी गई है. विश्वस्त सूत्रों के द्वारा बताया जा रहा है कि यह जमीन मुकेश ने अपनी पत्नी के नाम पर खरीदी है तथा यह बताया है कि, बाद में वह इसे बेचकर डीडीसी को पैसे दे देगा. किसी बड़े पद प्रशासनिक पदाधिकारी और भ्रष्टाचार के इस तरह के आरोप लगने के बाद प्रशासनिक महकमे में तो हड़कंप मच ही गया है उम्मीद यह भी है कि, शीघ्र ही कुछ बड़े खुलासे और भी होंगे. साथ ही भ्रष्टाचार के इस खेल में अन्य अधिकारियों के नाम उजागर होने की संभावना है.



















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