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मकर संक्रांति को लेकर गंगा घाटों पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब ..

मकर संक्रांति के दिन जल स्रोतों में अमृत का प्रवाह हो जाता है, जिसमें स्नान करने के बाद सारे पापों से मुक्ति, जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि प्राप्त हो जाती है. इसी मान्यता को लेकर विश्वामित्र की इस पावन भूमि पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. 

- मकर संक्रांति को लेकर दूर दराज से पहुंचे थे श्रद्धालु.
- रामरेखा घाट पर गंगा स्नान को लेकर दिन भर लगी रही भीड़.

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : ऐतिहासिक, धार्मिक एवं आस्था की नगरी बक्सर बुधवार को भक्तिमय दिखी. स्टेशन से रामरेखा घाट स्थित गंगा तट तक पहुंचनेवाला मुख्य मार्ग श्रद्धालुओं से दिन भर पटा रहा.  मकर संक्रांति के नीयत तिथि को माननेवाले हजारों श्रद्धालुओं ने दिन भर रामरेखा घाट पर गंगा में डुबकी लगाते दिखे. श्रद्धालुओं में ज्यादातर महिलाओं की संख्या रही. 

यूं तो बक्सर के सभी गंगा घाटों पर स्नानार्थियों की भीड़ लगी रही लेकिन, रामरेखा घाट पर यह भी कुछ ज्यादा ही थी राम से जुड़ा रामरेखा घाट अति प्राचीन धार्मिक स्थल है. यहां हिंदू सभ्यता व संस्कृति को माननेवाले लोग प्राय: सभी धार्मिक तिथियों को गंगा में डुबकी लगाने के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय पंडा अमरनाथ पांडेय उर्फ लाला बाबा के अनुसार मकर संक्रांति के दिन जल स्रोतों में अमृत का प्रवाह हो जाता है, जिसमें स्नान करने के बाद सारे पापों से मुक्ति, जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि प्राप्त हो जाती है. इसी मान्यता को लेकर विश्वामित्र की इस पावन भूमि पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. 

स्नान का सिलसिला 14 जनवरी 2015 से ही शुरू हो गया था, जो आज 15 जनवरी तक चला. दूर-दराज से आनेवाले लोग घाट पर मौजूद विवाह मंडप, घाट पर मौजूद मठों में कमरा बुक करा व कुछ लोग स्टेशन पर सोये मिले. वहीं, फुटपाथी दुकानदारों से पूरा गंगा घाट बाजार में तब्दील हो चुका था. स्नान के बाद दान-पुण्य की परंपरा को सफल बनाने के लिए न केवल जिले के बल्कि दूरदराज से असहाय सैकड़ों की संख्या में भिखारी पहुंचे.  मकर संक्रांति दो दिन मनने से इनकी भी चांदी थी. वहीं, पंडों द्वारा घाट पर कई मचान के साथ फोल्डिंग खटिया श्रद्धालुओं के लिए लगा दिया गया है. स्नान के बाद इन्हीं खाटों पर दान स्वरूप चावल, तिल, आटा, आलू वगैरह लोग दान करते हैं. मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा स्नान के बाद गरीबों को दान दिया जाता है. दान के बाद श्रद्धालु भोजन स्वरूप चूड़ा, दही, गुड़, तिलकुट का प्रसाद ग्रहण करते हैं. बाजार में चूड़ा, गुड़ की दुकानों पर काफी रही. बाजार में चूड़े की क्वालिटी के अनुसार ही उसकी कीमत निर्धारित की गयी है.  चूड़ा बाजार में सामान्य स्तर के 30 रुपये से 35 रुपये तक. जबकि उच्च क्वालिटी का चूड़ा 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बाजार में बिक रहा है. गुड़ भी बाजार में 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है.


















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