Buxar Top News: भ्रष्टतंत्र का शिकार बन गए भू अर्जन पदाधिकारी तौकीर अकरम, अंतिम पत्र में भी छोड़ गए कई अनसुलझे सवाल ..
डीएम ओएसडी सह भू-अर्जन पदाधिकारी तौकीर अकरम की मौत ने एक और जहां सबको शोकाकुल कर दिया है
- दो साल से बंद था वेतन, मानसिक दबाव बताया जा रहा आत्महत्या की वजह.
- स्थानांतरण के लिए वरीय अधिकारियों ने की थी लाखों रुपए घूस की मांग.
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: डीएम ओएसडी सह भू-अर्जन पदाधिकारी तौकीर अकरम की मौत ने एक और जहां सबको शोकाकुल कर दिया है, वहीं एक ईमानदार अधिकारी के इस तरह आत्महत्या जैसे कदम उठाने की बात ने सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
मां से पैसे लेकर हाईकोर्ट जाया करते थे अधिकारी: बताया जा रहा है कि स्वर्गीय अकरम पर पूर्व के किसी मामले में संलिप्तता का आरोप था. जिसको लेकर पटना हाईकोर्ट में मामला चल रहा था. जिसकी सुनवाई के दौरान वह बक्सर से पटना हाई कोर्ट आया जाया करते थे. पटना आने-जाने के दौरान अधिकारी के पास इतने भी पैसे नहीं होते थे कि वह न्यायिक कार्यों में लगने वाले खर्चे का भुगतान कर सके. हाईकोर्ट जाने के लिए वह अपनी मां से हजार-दो हज़ार रुपए लेकर जाया करते थे.
गमों को मुस्कुराहट के पीछे छिपा कर रखा था अधिकारी ने:
यहाँ समझा जा सकता है कि जिस अधिकारी का दो वर्षों से वेतन बंद हो उसकी स्थिति घर में क्या होगी? मां-बाप, पत्नी सबकी नजरों से वह व्यक्ति कैसे नजर मिला पाता होगा? कुछ इसी जद्दोजहद में जिंदगी गुजार रहे तौकीर अकरम ने व्यक्तिगत परेशानियों को अपनी मुस्कुराहट के पीछे छिपा कर रखा हुआ था.
वरीय अधिकारियों को नहीं दे सके घूस की गड्डी, करा लिया परमानेंट ट्रांसफर:
स्वर्गीय अकरम की मां ने बताया कि हाईकोर्ट में आने जाने में हो रही परेशानियों के मद्देनजर उन्होंने अपना स्थानांतरण करने की गुजारिश भी वरीय अधिकारियों से की थी, लेकिन भ्रष्टतंत्र के भ्रष्ट अधिकारियों ने उनसे लाखों रुपए घूस की मांग कर दी. भ्रष्ट अधिकारियों को शायद इस बात का अंदाजा नहीं था कि इतनी मालदार कुर्सी पर होने के बावजूद ईमानदार अधिकारी ने कभी किसी से एक रुपये भी रिश्वत लेने की कोशिश नहीं की थी. ऐसे में तनाव स्वर्गीय अधिकारी को अंदर ही अंदर खोखला करता रहा. बेसुध पड़ी माँ बार-बार कह रही थी कि वरीय अधिकारियों को घूस की गड्डी नहीं दे सकने के कारण उन्होंने यह कदम उठाया.
मामा से सीखा था ईमानदारी का पाठ:
बताया जा रहा है कि स्वर्गीय अकरम की पढ़ाई-लिखाई अपने मामा, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी फैज अकरम के यहां ही हुई थी. जहां उन्होंने बचपन से ही इमानदारी का पाठ पढ़ा था. लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि बीपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वह जिस सिस्टम का हिस्सा बनने जा रहे हैं वहां इस तरह की नौकरी का मतलब सिर्फ और सिर्फ रुपयों की खेती करना होता है. जबलपुर के रहने वाले तौकीर ने 2015 में बिहार सरकार की नौकरी बतौर राज्य प्रशासनिक अधिकारी ज्वाइन की थी.दुर्भाग्यवश तौकीर अकरम इस सिस्टम का हिस्सा नहीं बन सके और उन्होंने मौत को गले लगाना मुनासिब समझा. गौर करने वाली बात यह है कि उन्होंने अपने सुसाइड नोट में भी सिर्फ यही कहा है कि अपनी मौत के जिम्मेदार वह स्वयं है. अपने अंतिम पत्र में भी उन्होंने अपनी ईमानदारी का परिचय दुनिया के सामने छोड़ ही दिया है. बहरहाल, विचार योग्य बात यह है कि क्या ऐसे भ्रष्टतंत्र का शिकार यूं ही ईमानदार अधिकारी होते रहेंगे?
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