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एमवी कॉलेज में सीट बढ़ाने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे छात्र नेता ..

उन्होंने कहा कि, कॉलेज प्रशासन द्वारा नामांकन नहीं लिए जाने के कारण छात्र-छात्राओं के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है. समय निकल जाने के पश्चात अब उनका किसी अन्य महाविद्यालय में नामांकन भी नहीं हो सकेगा. 

- कहा, नई नीति से भ्रष्टाचार को मिला है बढ़ावा विद्यार्थियों का भविष्य अधर में.
-  प्राचार्य के आश्वासन के बाद  माने छात्र नेता.


बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: "महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय में स्नातक प्रथम वर्ष में नामांकन का कार्य नहीं शुरू किए जाने के कारण सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है. वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण विभाग के डीन के द्वारा कहा गया है कि, महाविद्यालय के प्राचार्य की गलती के कारण नामांकन नहीं किया जा सका है." यह कहना है छात्र नेता मुरारी मिश्रा का. स्नातक प्रथम वर्ष के कक्षाओं में विद्यार्थियों का नामांकन नहीं होने के विरोध में सोमवार से वह कॉलेज प्रांगण में आमरण अनशन पर बैठ गए.

उन्होंने कहा कि, कॉलेज प्रशासन द्वारा नामांकन नहीं लिए जाने के कारण छात्र-छात्राओं के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है. समय निकल जाने के पश्चात अब उनका किसी अन्य महाविद्यालय में नामांकन भी नहीं हो सकेगा. ऐसे में उनका एक वर्ष बर्बाद हो जाएगा. छात्र नेता ने कहा कि, महाविद्यालय द्वारा बार-बार लिस्ट निकाल कर छात्र छात्राओं को अंत तक सांत्वना दी जाती रही और फिर में अचानक से नामांकन बंद कर दिया गया. ऐसे में वह छात्र-छात्रा जिन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया था वे स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं.

छात्र नेता ने कहा कि पूर्व में चल रही व्यवस्था को हटाकर विश्वविद्यालय द्वारा की गई नई व्यवस्था से भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ बल्कि और बढ़ गया है. यह भ्रष्टाचार अब कॉलेज प्रशासन तथा विश्वविद्यालय की मिलीभगत से हो रहा है. उन्होंने कहा कि, नामांकन से वंचित विद्यार्थियों का नामांकन जब तक नहीं लिया जाएगा तब तक वह अनशन से नहीं हटेंगे. मौके पर छात्र नेता रवि यादव, पीयूष यादव, तुषार यादव, तुषार विजेता, विकास यादव, अमन सिंह मौर्य, विकास कुमार, साजिद अली, सुदीप कुमार, सतीश पाल समेत कई छात्र-छात्राएं एवं छात्र नेता मौजूद थे.

इस मामले में कॉलेज के प्राचार्य नवीन कुमार से बात करने पर उन्होंने बताया कि छात्र नेता मुरारी मिश्रा का मांग पत्र लेकर उसे विश्वविद्यालय में भेज दिया गया है. उनसे अनुरोध किया गया कि वह अपना अनशन वापस ले लें. प्राचार्य ने बताया कि, विश्वविद्यालय से मिले निर्देशों के आलोक में आगे की कार्रवाई की जाएगी.



















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