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अपराधी चंदन गुप्ता गिरफ्तार, एके-47 समेत कई हथियार भी बरामद ..

पटना एसटीएफ की टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया. पुलिस मुख्यालय ने उसपर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. कुख्यात पर बक्सर, रोहतास, भोजपुर, व सिवान समेत अन्य जिलों में हत्या, लूटपाट, व रंगदारी, गोलीबारी जैसे दो दर्जन संगीन मामले हैं. 

- पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से की गई गिरफ्तारी.
- डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की विशेष रणनीति आई काम.

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: व्यवसायियों से रंगदारी  गोलीबारी तथा हत्या जैसे कई मामलों में वांछित तथा पुलिस के लिए सिरदर्द बना चंदन गुप्ता आखिरकार पकड़ा गया. पुलिस ने उसे पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से गिरफ्तार कर लिया है. शाहाबाद प्रक्षेत्र में आतंक का पर्याय कुख्यात चंदन गुप्ता पकड़ा गया. पटना एसटीएफ की टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया. पुलिस मुख्यालय ने उसपर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. कुख्यात पर बक्सर, रोहतास, भोजपुर, व सिवान समेत अन्य जिलों में हत्या, लूटपाट, व रंगदारी, गोलीबारी जैसे दो दर्जन संगीन मामले हैं. एक दर्जन मामले अकेले बक्सर जिले में हैं.

एक साल से तलाश में थी पुलिस:

एक साल से बिहार पुलिस को उसकी सरगर्मी से तलाश थी. वांटेड चंदन गुप्ता बक्सर जिले के डुमरांव थाने के कसिया गांव का निवासी बताया जाता है. सूत्रों की मानें तो पकड़े गए कुख्यात की निशानदेही पर एसटीएफ संभावित ठिकानों से एके-47, रायफल व पिस्तौल समेत कई और अवैध हथियारों को बरामद करने के प्रयास में लगी हुई है. इसके लिए डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने एसटीएफ के चुनिदा अफसरों को जिम्मेवारी सौंपी थी. वह लगातार ठिकाना बदल रहा था. सूत्रों के अनुसार, एसटीएफ, पटना को मोबाइल सर्विलांस के जरिए जानकारी मिली कि चंदन गुप्ता पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में छिपा हुआ है. वहीं से बिहार में गैंग का संचालन कर रहा है. इसके बाद पटना से एसटीएफ टीम को दुर्गापुर भेजा गया. टीम ने घेराबंदी कर वांटेड चंदन को धर दबोचा. विशेष वाहन से उसे पटना लाया गया.


ठेकेदार धनजी सिंह की हत्या से कुख्यात बना चंदन

शाहाबाद के जिलों में आतंक का पर्याय बन चुका चंदन गुप्ता की गिरफ्तारी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई थी. एक साल से स्पेशल टास्क फोर्स ने इस अपराधी को अपने राडार पर ले रखा था, लेकिन हर बार वह पुलिस को चकमा देने में कामयाब हो जाता था. इसी साल अगस्त में पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपये का ईनाम घोषित किया था.

गिरोह में हैं तीस से अधिक सदस्य:

बताया जाता है कि, चंदन सुपारी किलर से कुख्यात अपराधी बना. चंद पैसे के लिए किसी की भी जान ले लेना उसके लिए बाएं हाथ का खेल है. बक्सर, आरा और सासाराम में वह अपना आपराधिक नेटवर्क संचालित करता है और उसके गिरोह में तीस से सदस्य हैं. हालाकि, उनमें से अधिकाश अभी जेल में हैं. पुलिस ने उस पर दबिश बनाने के लिए डुमरांव थाना कसियां गाव में उसके घर पर कुर्की भी की, लेकिन उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी.

धनजी सिंह की हत्या के बाद बना कुख्यात:

पुलिस सूत्रों के अनुसार वर्ष 2015 में पहली बाद चंदन गुप्ता का नाम लूट के केस में सामने आया इस मामले में वह जेल भी गया. जमानत पर बाहर आने के बाद वह बड़े अपराध करने लगा. वर्ष 2017 में धनजी सिंह उनके तीन सहयोगियों को मार चंदन गुप्ता कुख्यात बन गया. बताया जाता है कि धनजी की हत्या के लिए उसे किसी ने सुपारी दी थी। इस हत्याकाड के बाद उसने अपने दहशत का इस्तेमाल व्यवसाइयों से दोहन में किया. डुमराव में मुर्गा व्यवसायी दिनेश श्रीवास्तव की हत्या में भी चंदन का नाम सामने आया. उसके बाद पुलिस उसे पकड़ने में जुटी तो उसने शहर कई प्रसिद्ध व्यवसायियों से फोनकर रंगदारी मागने का सिलसिला शुरू कर दिया. जिसने भी उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत की, उस पर उसने गोलीबारी शुरू कर दी. डुमरांव में एक हार्डवेयर दुकान में उसने पुलिस की मौजूदगी में गोलीबारी की थी. इसके बाद पुलिस ने उसके के साथियों को पकड़ा, लेकिन चंदन पकड़ में नहीं आया.

इंटरनेट कॉलिंग का करता है इस्तेमाल::

किसी भी अपराधी को पकड़ने में पुलिस आजकर तकनीक का सहारा लेती है. पुलिस की मानें तो चंदन गुप्ता मोबाइल फोन का इस्तेमाल नही करता है, इसी वजह से उसका सुराग पुलिस को इतने दिनों तक नहीं मिला. वह अपने गुगरें को इंटनेट कॉलिंग के द्वारा टार्गेट दे देता था. इसके अलावा वह अपने साथियों के माध्यम से सूचना का आदान-प्रदान करता था. इस वजह से इतने दिनों तक एसटीएफ के हाथपाव मारने के बाद भी वह नहीं पकड़ा जा सका था.
















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