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Buxar Top News: रफ़ीक़ की जुदाई: बहुत खामोशी से विदा हो गया ठिठुरते गणतंत्र का एक और गण ..

कचहरी परिसर से एक कर्मी की खामोश विदाई बहुत कुछ कहती है.

- 32 साल तक कचहरी परिसर में बांधते रहे गणतंत्र का झंडा.
- खामिशी से हो गए कचहरी से जुदा.

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: एक और जहां नई पीढ़ियां गणतंत्र के मायने भूलते जा रही है वही बक्सर के रफ़ीक़ 32 साल से कचहरी परिसर में गणतंत्र का झंडा बांधते रहे. 32 साल से अधिवक्ताओं के परिसर में भी झंडा बांधते और गाड़ते रहे.
जमा पूंजी कुछ थी नहीं, कचहरी के चपरासी रहे लेकिन इस गणतंत्र में साल के दो सार्वजनिक अवकाशों यथा स्वन्त्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर कभी छुट्टी नहीं ले पाए क्योंकि ज़िला जज के आवास पर भी झंडा  बाँधना पड़ता था कभी किसी नाज़िर ने उन्हें छुट्टी पर जाने नहीं दिया.
अचानक 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो गए !

कोई विदाई नही. कोई सेवांत लाभ भी नहीं.
ठिठुरते गणतंत्र से विदा हो गया एक कचहरी का गण ! हालांकि, इस खामोश विदाई ने बिन बोले ही बहुत कुछ कह दिया.
 














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