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छठ पूजा की शुभकामनाएं: अर्थ पर भारी पड़ा शास्त्र, गिरी धर्म की दीवार, 100 करोड़ रहा फलों का कारोबार ..

बताते हैं कि, शहर की गंगा जमुनी तहजीब ऐसी है कि, मुस्लिम समुदाय ही धार्मिक सुचिता के साथ फ़ल व्यवसाय छठ पर्व में किया है. कहीं धर्म आड़े नहीं आया उल्टे सारिमपुर स्थित गंगा छठ घाट की सज्जा एवं बिजली सजावट सारिमपुर के युवकों ने की है.


- बक्सर में गुलजार रहा बाज़ार, आस्था के महापर्व की धूम.
ग्लोबल है बाज़ार, चीन से लेकर इंडोनेशिया तक से आया है फल.

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: छठ पर्व पर  बक्सर का बाज़ार सब पर भारी पड़ा है. फ़ल के व्यवसाय में तो अर्थ पर शास्त्र ही भारी पड़ गया. कई दुकानदार जो छठ पर्व नहीं मनाते हैं, छठ मैया की जय बोलकर ही अपना धंधे का डंका बजा दिये.

100 करोड़ रुपये का रहा फल का कारोबार:

नई बाज़ार से गोलंबर तक के फुटपाथ बाज़ार ने करीब 100 करोड़ रुपये का बाज़ार गुलज़ार किया. एक थोक व्यापारी के पास 18 ट्रक केला, 6 ट्रक सेव, 5 ट्रक सन्तरा और दस ट्रक अन्य फ़ल जैसे अनार, नासपाती, नारियल अनानास आदि के आये जिसमें 15 फीसदी तक खराब हो जाते है और बाक़ी बिक गये और तो और बिना मौसम के अंगूर भी एक ट्रक बिक गये. 

बड़की सारिमपुर के शमशाद खान के परिवार का बक्सर में फ़ल का थोक कारोबार है, उनके यहाँ इस बार फ़ल का बाज़ार ही 5 करोड़ रुपए का था. फल कारोबार से जुड़े थोक विक्रेता तथा खुदरा विक्रेताओं का कहना था कि, भगवान का प्रसाद है, मुनाफ़ा नहीं कमाना चाहते हैं, बस बेचते जाना है, और तीन दिन में शहर फलों, इखों, कच्चे अदरख , मुनको, मूलियों आंवलों कोहड़ा आदि से अंट गया और तीन दिन में बिक भी गया. छठ का अर्थशास्त्र में शास्त्र ही अर्थ पर भारी पड़ा और फ़ल इतना बिका कि, लोग महंगाई और मंदी भूल गए.

छठ ने गिराई धर्म की दीवार :

चूँकि फ़ल व्यवसाय पर ज़िले में एक वर्ग का ही दबदबा हैं जिस कारण छठ पर्व ने धर्म की दूरी पाट दी एवं सभी थोक व्यापारी और खुदरा विक्रेताओं ने छठ का जयघोष करते हुए कारोबार किया.  बड़की सारिमपुर के इबरार खान और शकील खान बताते हैं कि, शहर की गंगा जमुनी तहजीब ऐसी है कि, मुस्लिम समुदाय ही धार्मिक सुचिता के साथ फ़ल व्यवसाय छठ पर्व में किया है. कहीं धर्म आड़े नहीं आया उल्टे सारिमपुर स्थित गंगा छठ घाट की सज्जा एवं बिजली सजावट सारिमपुर के युवकों ने की है.

ग्लोबल है बाज़ार, चीन से लेकर इंडोनेशिया तक से आया है फल:

बाज़ार भी ग्लोबल हो गया है, एक फ़ल इमू चीन से तो नाशपाती इंडोनेशिया का था, और तो और सेव भी चीन से आया था, भारतीय सेव भी थे लेकिन चीन वाले से महंगे दामों पर बिके. क्योंकि, हिमांचल प्रदेश से फल लाने के ट्रांसपोर्ट का खर्च चीन से फल लाने के खर्च से कम है.

दर्जियों और बैंड बाजे वालों का कारोबार भी फला-फूला:

बक्सर के दर्जियों का कारोबार , बैंड बाजा वालों का भी कारोबार फलाफूला है. कई छठ व्रतियों की मनौती रहती हैं कि छठ गाजे बाजे के साथ करना है इसलिए गाजा बाजा वाले भी आज व्यस्त रहे और उनकी भी आज कमाई का जरिया छठ मैया बनी है. यही नहीं, छठ पर्व के कई सामान तो मुस्लिम समुदाय द्वारा ही तैयार किया जाता रहा है. छठ में धर्म की खाई पट जाती हैं, बाजार धर्म के नाम पर फर्राटे भरने लगता है.

छठ पर्व ऐसा कि इंडोनेशिया की नासपाती से झारखंड का मकोय तक बिका, उत्तरप्रदेश का ईख तो महाराष्ट्र का सन्तरा, चीन से लेकर कश्मीर तक का सेव बिका, वहीं बक्सर के धरहरा का मूली भी बिका, बिका सिंदूर, फिरोजाबाद का चूड़ी तो बिक गया जूतियों के दुकान से कटरीना सैंडल औऱ ऐश्वर्या का बिंदी, सब बिका केवल लोग और आस्था ही नहीं बिके उल्टे सबपर भारी पड़े. यहीं छठ पर्व की महत्ता भी और मर्यादा भी बक्सर टॉप न्यूज़ की ओर से सभी भक्तों, पाठकों, विज्ञापनदाताओं, आलोचकों और अंत मे खबरों की सुध लेने वालों मान्यवरों को शुभकामनाएं!




















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