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अच्छी खबर: 164 करोड़ रुपये की लागत से फिर शुरु होगी सीवरेज तथा वॉटर ट्रीटमेंट परियोजना ..

नगर में जल-मल शोधन ढांचा विकसित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा गंगा नदी में गिरने वाले चार बड़े नालों के द्वारा गंगा में जा रहे दूषित जल तथा मल को शोधित करने का संयंत्र स्थापित करने की योजना को एक बार पुनः शुरु होने जा रही है.
सारीमपुर में अधूरा पड़ा जल शोधन संयंत्र का निर्माण

- प्रशासनिक स्वीकृति के लिए विभाग को भेजे गए निविदा के कागज़ात
- वर्ल्ड बैंक के सहयोग से नमामि गंगे योजनांतर्गत हो रहा कार्य.
- चार प्रमुख नालों का जल किया जाएगा शोधित

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा के निर्मल स्वरूप को लौटाने  का प्रयास देश भर में किया जा रहा है. बक्सर में भी  इसको लेकर युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं. नगर में जल-मल शोधन ढांचा विकसित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा गंगा नदी में गिरने वाले चार बड़े नालों के द्वारा गंगा में जा रहे दूषित जल तथा मल को शोधित करने का संयंत्र स्थापित करने की योजना को एक बार पुनः शुरु होने जा रही है.

बताया जा रहा है कि नमामि गंगे योजना के अंतर्गत विश्व बैंक के सहयोग से पूरी होने वाली यह योजना मार्च के प्रथम सप्ताह से शुरू हो सकती है. इसके लिए विभाग से प्रशासनिक स्वीकृति मांगी गई है. उम्मीद है कि, प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के पश्चात फरवरी माह के मध्य में टेंडर की प्रक्रिया होगी और मार्च के आरंभ से कार्य शुरू भी हो जाएगा.

कार्यरत कंपनी को किया गया है ब्लैक लिस्टेड:

वर्ष 2011 में मंजूरी मिलने के बाद नगर में सीवरेज निर्माण का कार्य चीन की अनुभवी कंपनी ट्राइटेक को दिया गया था, जिसको लेकर कंपनी ने नगर में जगह-जगह गड्ढे खोदकर पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरु हुआ था. कंपनी द्वारा वर्ष 2014 में निर्माण का कार्य पूरा कर लिया जाना था. लेकिन, उस वक्त तकरीबन 100 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना को लेकर प्रारंभिक चरण में ही ट्राइटेक के साथ हुए गतिरोध के बाद काम बंद कर दिया गया था. दरअसल, बार-बार मिल रही अनियमितता कि शिकायतों के बावजूद सुधार नहीं होने के कारण कंपनी को काम से हटाने के साथ ही उसे ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया था. जिसके कारण वर्षों से परियोजना का कार्य बंद पड़ा हुआ है.

फिर से शुरू हो रही है पूरी प्रक्रिया, 164.23 करोड़ रुपये है कुल लागत:

इधर, सरकार एक बार फिर बंद पड़ी इस परियोजना को शुरू करने की कयावद में जुट गई है. इसको लेकर बक्सर के अधिकारियों के द्वारा निविदा के कागजात तैयार करके एनमसीजी को भेजे गए हैं. जहाँ से प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के पश्चात शीघ्र ही टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, जिसके बाद नई कंपनी के द्वारा सीवरेज का कार्य शुरु कर दिया जाएगा तथा जल मल शोधन संयंत्र की स्थापना के कार्य को भी पूरा कर लिया जाएगा. हालांकि, इस बार योजना 164.23 करोड़ रुपये की है. जिसे दो वर्ष में पूरा किया जाना है. दूसरी तरफ इस बार भी यह टेंडर किसी विदेशी कंपनी को ही मिलने की संभावना है. क्योंकि, सरकार के नियमों के अनुसार कंपनी को सीवरेज के सफल संचालन का अनुभव होना चाहिए. ऐसे में भारत में ऐसी कंपनी का मिलना संभव नहीं है.

जल शोधन के बाद गंगा में बहाया जाएगा शुद्ध एवं निर्मल जल अवशेष से बनेगी खाद:

गंगा नदी में अकेले बक्सर नगर से प्रतिदिन लगभग 8 लाख लीटर नाले का पानी बहाया जा रहा है. जिससे कि पतित पावनी गंगा दिन प्रतिदिन मैली होती जा रही है. इस योजना के तहत घरों से निकलने वाले गंदे पानी को शुद्ध कर गंगा में बहाया जाना है. बताया जा रहा है कि इस परियोजना में स्थापित जल शोधन संयंत्रों के द्वारा दो तरह के संयंत्र स्थापित किए जाने हैं. एक तरफ जहां नालों के पानी को साफ किया जाएगा वहीं दूसरी तरफ मल तथा अन्य अवशेषों को भी पानी से निकालकर अलग किया जाएगा. प्लास्टिक तथा अन्य पुनर्चक्रित होने वाले अवशिष्ट को अलग तथा मल तथा अन्य अवशिष्ट से खाद बनाए जाने की योजना है.

कहते हैं अधिकारी:

सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य एक बार फिर शुरु करने की प्रक्रिया शुरु कर दी गयी है. निविदा के कागज़ात प्रशासनिक स्वीकृति के लिए विभाग को भेजा गया है. स्वीकृति के बाद टेंडर की प्रक्रिया पूरी करते हुए कार्य शुरु होगा.

केदार प्रसाद साहू
कार्यपालक अभियंता,
वुडको















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